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Wednesday, November 19, 2014

Bhakti

एक गरीब बालक था जो कि अनाथ था।
एक दिन वो बालक एक संत के आश्रम मेँ
आया और बोला के बाबा आप सबका ध्यान
रखते है,मेरा इस दुनिया मेँ कोई नहीँ हैँ
तो क्या मैँ यहाँ आपके आश्रम मेँ रह सकता हूँ?
बालक की बात सुनकर संत बोले बेटा तेरा नाम क्या है?
उस बालक ने कहा मेरा कोई नाम नहीँ हैँ।
तब संत ने उस बालक का नाम रामदास
रखा और बोले की अब तुम यहीँ आश्रम मेँ
रहना।
रामदास वही रहने लगा और आश्रम के सारे काम
भी करने लगा।
उन संत की आयु 80 वर्ष
की हो चुकी थी।
एक दिन वो अपने शिष्यो से बोले की मुझे
तीर्थ यात्रा पर जाना हैँ तुम मेँ से कौन कौन
मेरे मेरे साथ चलेगा और कौन कौन आश्रम मेँ
रुकेगा? संत की बात सुनकर सारे शिष्य बोले
की हम
आपके साथ चलेंगे.!
क्योँकि उनको पता था की यहाँ आश्रम मेँ
रुकेंगे तो सारा काम करना पड़ेगा इसलिये
सभी बोले की हम तो आपके साथ
तीर्थ
यात्रा पर चलेंगे। अब संत सोच मेँ पड़ गये की किसे साथ
ले जाये
और किसे नहीँ क्योँकि आश्रम पर
किसी का रुकना भी जरुरी था।
बालक रामदास संत के पास आया और
बोला बाबा अगर आपको ठीक लगे तो मैँ
यहीँ आश्रम पर रुक जाता हूँ। संत ने
कहा ठीक हैँ पर तुझे काम
करना पड़ेगा आश्रम की साफ सफाई मे भले
ही कमी रह जाये पर ठाकुर
जी की सेवा मे
कोई कमी मत रखना।
रामदास ने संत से कहा की बाबा मुझे
तो ठाकुर
जी की सेवा करनी नहीँ आती आप
बता दिजीये के ठाकुर
जी की सेवा कैसे
करनी है? फिर मैँ कर दुंगा।
संत रामदास को अपने साथ मंदिर ले गये
वहाँ उस मंदिर मे राम दरबार
की झाँकी थी।
श्रीराम जी,सीता जी,
लक्ष्मणजी और हनुमान जी थे।
संत ने बालक रामदास को ठाकुर
जी की सेवा कैसे करनी है सब
सिखा दिया।
रामदास ने गुरु जी से
कहा की बाबा मेरा इनसे
रिशता क्या होगा ये भी बता दो क्योँकि अगर रिशता पता चल
जाये तो सेवा करने मेँ आनंद आयेगा।
उन संत ने बालक रामदास कहा की तु
कहता था ना की मेरा कोई नहीँ हैँ तो आज
से ये रामजी और सीताजी तेरे
माता-
पिता हैँ। रामदास ने साथ मेँ खड़े लक्ष्मण
जी को देखकर
कहा अच्छा बाबा और ये जो पास मेँ खड़े है
वो कौन है?
संत ने कहा ये तेरे चाचा जी है और हनुमान
जी के लिये कहा की ये तेरे बड़े भैय्या है।
रामदास सब समझ गया और फिर उनकी सेवा करने लगा।
संत शिष्योँ के साथ यात्रा पर चले गये।
आज सेवा का पहला दिन था रामदास ने सुबह
उठकर स्नान किया और भिक्क्षा माँगकर
लाया और फिर भोजन तैयार किया फिर
भगवान को भोग लगाने के लिये मंदिर आया। रामदास ने
श्रीराम सीता लक्ष्मण और
हनुमान जी आगे एक-एक थाली रख
दी और
बोला अब पहले आप खाओ फिर मैँ
भी खाऊँगा।
रामदास को लगा की सच मेँ भगवान बैठकर
खायेंगे. पर बहुत देर हो गई
रोटी तो वैसी की वैसी थी।
तब बालक रामदास ने
सोचा नया नया रिशता बना हैँ
तो शरमा रहेँ होँगे।
रामदास ने पर्दा लगा दिया बाद मेँ खोलकर देखा तब
भी खाना वैसे
का वैसा पडा था।
अब तो रामदास रोने लगा की मुझसे सेवा मे
कोई गलती हो गई इसलिये
खाना नहीँ खा रहेँ हैँ!
और ये नहीँ खायेंगे तो मैँ
भी नहीँ खाऊँगा और मैँ भुख से मर
जाऊँगा..!
इसलिये मैँ तो अब पहाड़ से कूदकर ही मर
जाऊँगा।
रामदास मरने के लिये निकल जाता है तब
भगवान रामजी हनुमान जी को कहते हैँ
हनुमान जाओ उस बालक को लेकर आओ और बालक से
कहो की हम खाना खाने के लिये
तैयार हैँ।
हनुमान जी जाते हैँ और रामदास कूदने
ही वाला होता हैँ की हनुमान
जी पिछे से
पकड़ लेते हैँ और बोलते हैँ क्याँ कर रहे हो?
रामदास कहता हैँ आप कौन? हनुमान जी कहते है
मैँ तेरा भैय्या हूँ
इतनी जल्दी भूल गये?
रामदास कहता है अब आये हो इतनी देर से
वहा बोल रहा था की खाना खालो तब
आये नहीँ अब क्योँ आ गये?
तब हनुमान जी बोले पिता श्री का आदेश हैँ
अब हम सब साथ बैठकर खाना खायेँगे।
फिर रामजी,सीताजी,
लक्ष्मणजी ,हनुमान
जी साक्क्षात बैठकर भोजन करते हैँ।
इसी तरह रामदास रोज
उनकी सेवा करता और भोजन करता।
सेवा करते 15 दिन हो गये एक दिन रामदास ने
सोचा की कोई भी माँ बाप हो वो घर मेँ
काम तो करते ही हैँ.
पर मेरे माँ बाप तो कोई काम नहीँ करते सारे
दिन खाते रहते हैँ.
मैँ ऐसा नहीँ चलने दूँगा।
रामदास मंदिर जाता हैँ ओर कहता हैँ पिता जी कुछ बात
करनी हैँ आपसे।
रामजी कहते हैँ बोल बेटा क्या बात हैँ?
रामदास कहता हैँ की अब से मैँ अकेले काम
नहीँ करुंगा आप सबको भी काम
करना पड़ेगा,
आप तो बस सारा दिन खाते रहते हो और मैँ
काम करता रहता हूँ अब से ऐसा नहीँ होगा। राम
जी कहते हैँ तो फिर बताओ बेटा हमेँ
क्या काम करना है?
रामदास ने
कहा माता जी (सीताजी) अब
से रसोई आपके हवाले.
और चाचा जी(लक्ष्मणजी) आप
सब्जी तोड़कर लाओँगे. और
भैय्या जी (हनुमान जी) आप
लकड़ियाँ लायेँगे.
और पिता जी(रामजी) आप पत्तल बनाओँगे।
सबने कहा ठीक हैँ।
अब सभी साथ मिलकर काम करते हुऐँ एक
परिवार की तरह सब साथ रहने लगेँ। एक दिन वो संत
तीर्थ यात्रा से लौटे
तो सिधा मंदिर मेँ गये और देखा की मंदिर से
प्रतिमाऐँ गायब हैँ.
संत ने सोचा कहीँ रामदास ने प्रतिमा बेच
तो नहीँ दी?
संत ने रामदास को बुलाया और पुछा भगवान कहा गये?
रामदास भी अकड़कर बोला की मुझे
क्या पता रसोई मेँ कही काम कर रहेँ होंगे।
संत बोले ये क्या बोल रहा?
रामदास ने कहा बाबा मैँ सच बोल रहा हूँ
जबसे आप गये हैँ ये चारोँ काम मेँ लगे हुऐँ हैँ। वो संत भागकर
रसोई मेँ गये और सिर्फ एक
झलक
देखी की सीता जी भोजन
बना रही हैँ
राम जी पत्तल बना रहे है और फिर वो गायब
हो गये और मंदिर मेँ विराजमान हो गये।
संत रामदास के पास गये और बोले आज तुमने मुझे
मेरे ठाकुर का दर्शन कराया तु धन्य हैँ। और संत ने रो रो कर रामदास
के पैर पकड़
लिये...!
भक्त मित्रोँ कहने का अर्थ यही हैँ
की ठाकुर
जी तो आज भी तैयार हैँ दर्शन देने के लिये
पर
कोई रामदास जैसा भक्त
भी तो होना चाहीये...

Tuesday, November 4, 2014

Hindu Science

 नासा के वैज्ञानीको ने
माना की सूरज से "ॐ" की आवाज निकलती है? →क्यो अमेरिका ने भारतीय देशी गौमुत्र पर 4
Patent लिया व कैंसर और दूसरी बिमारियो के
लिये दवाईया बना रहा है ? जबकी हम गौमुत्र
का महत्व हजारो साल पहले से जानते है! →क्यो अमेरिका के सेटन हाल यूनिवर्सिटी मे
गीता पढाई जा रही है? →क्यो इस्लामिक देश इंडोनेशिया के Aeroplane
का नाम भगवान नारायण के वाहन गरुड के नाम
पर Garuda Indonesia है जिसमे Garuda का symbol
भी है? क्यो इंडोनेशिया के रुपए पर भगवान गणेश
की फोटो है? →क्यो बराक ओबामा हमेशा अपनी जेब मे
हनुमान जी की फोटो रखते है? →क्यो आज पूरी दुनिया योग-प्राणायाम
की दिवानी है? →क्यो भारतीय हिंदू वैज्ञानीको ने
हजारो साल पहले
ही बता दिया की धरती गोल है ? →क्यो जर्मनी के Aeroplane का संस्कृत नाम
Lufthansa है ? →क्यो हिंदुओ के नाम पर अफगानिस्थान के
पर्वत का नाम हिंदूकुश है? →क्यो हिंदुओ के नाम पर हिंदी भाषा,
हिन्दुस्तान, हिंद महासागर.. ये सभी नाम है? →क्यो वियतनाम देश मे Visnu भगवान की 4000
साल पुरानी मूर्ति पाई गई? →क्यो अमेरिकी विज्ञानीक Haward ने शोध
के बाद माना की गायत्री मंत्र मे 110000 freq
के कंपन है? →क्यो बागबत की बडी मस्जिद के इमाम ने
सत्यार्थ- प्रकाश पढने के बाद हिंदू धर्म
अपनाकर महेंद्रपाल आर्य बनकर
हजारो मुस्लिमो को हिंदू बनाया और वो कई
बार जाकिर नाईक से debate के लिये कह चुके है
मगर जाकिर की हिम्म्त नही हुइ..! →अगर हिंदू धर्म मे यज्ञ करना अंधविश्वास है
तो क्यो भोपाल गैस कांड मे जो कुशवाह
परिवार एकमात्र बचा जो उस समय यज्ञ कर
रहा था, गोबर पर घी जलाने से १० लाख टन
आक्सीजन गैस बनती है..!! →क्यो Julia Roberts (American actress and
producer) ने हिंदू धर्म अपनाया और वो हर रोज
मंदिर जाती है. →अगर रामायण झूठा है तो क्यो दुनियाभर मे
केवल रामसेतू के ही पत्थर आज भी तैरते है? →अगर महाभारत झूठा है तो क्यो भीम के पुत्र
''घटोत्कच'' का विशालकाय कंकाल वर्ष 2007
में नेशनल जिओग्राफी की टीम ने भारतीय
सेना की सहायता से उत्तर भारत के इलाके में
खोजा? →क्यो अमेरिका के
सैनिकों को अफगानिस्तान (कंधार) की एक
गुफा में 5000 साल पहले का महाभारत के समय
का "विमान" मिला है? । ये जानकारिया आप खुद Google मे Search कर
सकते है 

Monday, October 27, 2014

गाय एक अद्भुत रसायनशाला है ।


" जननी जनकार ढूध पिलाती , केवल साल छमाही भर ;
" गोमाता पय-सुधा पिलाती , रक्षा करती जीवन भर " ।

- अमेरिका के कृषि विभाग द्वारा प्रकाशित हुई पुस्तक " THE COW IS A WONDERFUL LABORATORY " के अनुसार प्रकृति ने समस्त जीव-जंतुओं और सभी दुग्धधारी जीवों में केवल गाय ही है जिसे ईश्वर ने 180 फुट (2160 इंच ) लम्बी आंत दी है जो की एनी पशुओ में ऐसा नहीं है जिसके कारण गाय जो भी खाती-पीती है वह अंतिम छोर तक जाता है ।

लाभ :- जिस प्रकार दूध से मक्खन निकालने वाली मशीन में जितनी अधिक गरारियां लगायी जाती है उससे उतना ही वसा रहित मक्खन निकलता है , इसीलिये गाय का दूध सर्वोत्तम है ।

गो वात्सल्य :- गौ माता बच्चा जनने के 18 घंटे तक अपने बच्चे के साथ रहती है और उसे चाटती है इसीलिए वह लाखो बच्चों में भीवह अपने वच्चे को पहचान लेती है जवकि भैस और जरसी अपने बच्चे को नहीं पहचान पायेगी । गाय जब तक अपने बच्चे को अपना दूध नहीं पिलाएगी तब तक ढूध नहीं देती है , जबकि भैस , जर्सी होलिस्टयन के आगे चारा डालो और ढूध दुह लो ।

*** बच्चो में क्रूरता इसीलिए बढ़ रही है क्योकि जिसका ढूध पी रहे है उसके अन्दर ममता नहीं है ।

खीस :- बच्चा देने के गाय के स्तन से जो दूध निकलता है उसे खीस, चाका, पेवस, कीला कहते है , इसे तुरंत गर्म करने पर फट जाता है । वच्चा देने के 15 दिनों तक इसके दूध में प्रोटीन की अपेक्षा खनिज तत्वों की मात्रा अधिक होती है , लेक्टोज , वसा ( फैट ) एवं पानी की मात्रा कम होती है ।
खीस वाले दूध में एल्व्युमिन दो गुनी , ग्लोव्लुलिन 12-15 गुनी तथा एल्युमीनियम की मात्रा 6 गुनी अधिक पायी जाती है ।
लाभ:- खीज में भरपूर खनिज है यदि काली गौ का ढूध ( खीझ) एक हफ्ते पिला देने से वर्षो पुरानी टी वी ख़त्म हो जाती है ।

सींग :- गाय की सींगो का आकर सामान्यतः पिरामिड जैसा होता है , जो कि शक्तिशाली एंटीना की तरहआकाशीय उर्जा ( कोस्मिक एनर्जी ) को संग्रह करने का कार्य सींग करते है ।

गाय का ककुद्द ( ढिल्ला ) :- गाय के कुकुद्द में सुर्य्केतु नाड़ी होती है जो सूर्य से अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकती है , 40 मन ढूध में लगभग 10 ग्राम सोना पाया जाता है जिससे शारीर की प्रतिरोधक क्षमता बढती है इसलिए गाय का घी हलके पीले रंग का होता है ।

गाउ का दूध :- गाय के दूध के अन्दर जल 87 % वसा 4 %, प्रोटीन 4% , शर्करा 5 % , तथा अन्य तत्व 1 से 2 % प्रतिसत पाया जाता है ।

गाय के दूध में 8 प्रकार के प्रोटीन , 11 प्रकार के विटामिन्स , गाय के दूध में ' कैरोटिन ' नामक प्रदार्थ भैस क्र दस गुना अधिक होता है ।

भैस का दूध गर्म करने पर उसके पोषक ज्यादातर ख़त्म हो जाते है परन्तु गाय के दुध के पोषक तत्व गर्म करने पर भी सुरक्षित रहता है ।

गाय का गोमूत्र :- गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है , इसके अन्दर ' कार्बोलिक एसिड ' होता है जो कीटाणु नासक है , गौ मूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे ख़राब नहीं होता है इसमें कैसर को रोकने वाली ' करक्यूमिन ' पायी जाती है ।

गौ मूत्र में नाइट्रोजन ,फास्फेट, यूरिक एसिड , पोटेशियम , सोडियम , लैक्टोज , सल्फर, अमोनिया, लवण रहित विटामिन ए वी सी डी ई , इन्जैम आदि तत्व पाए जाते है ।

देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से ' प्रोपिलीन ऑक्साइड " उत्पन्न होती है जो वारिस लाने में सहायक होती है । इसी के मिश्रण से ' इथिलीन ऑक्साइड ' गैस निकलती है जो ओपरेशन थियटर में काम आता है ।
गौ मूत्र में मुख्यतः 16 खनिज तत्व पाये जाते है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाता है ।

गाय का शरीर :- गाय के शरीर से पवित्र गुग्गल जैसी सुगंध आती है जो वातावरण को शुद्ध और पवित्र करती है ।

कृपया हिंदुत्व व आध्यात्म के ज्ञान को और अटूट करने के लिए शेयर करें ... _/|\_

जय गौ माता ... जय हिंदुत्व ...

जय हिन्द .... वन्देमातरम ....

Thursday, October 23, 2014

शुभ दीपावली

💥💮
हम अपनी  एवं अपने परिवार की ओर से आपको सपरिवार दीपावली  के त्यौहार पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं।
दीपावली का ये पर्व रिद्धि व सिद्धि का  प्रतीक पर्व हैे । अखिल ब्रम्हांड नायक भगवान श्रीहरि विष्णु  जी के हृदय स्थल  मेँ विराजित माता श्री महालक्ष्मीदेवी, अविरल सुख संपति संपदा सोभाग्य समृद्धि व सदभाव की  ज्योति आपके जीवन मेँ जगमगाती रहे तथा श्री गणेशजी व् माँ सरस्वतीजी की कृपा से आपका परिवार संपूर्ण वैभव, सुख,  शिक्षा, सगुण और सहोदर से परिपूर्ण हो  ऐसी हम देवगणों से प्रार्थना करते हैं।
शुभ दीपावली।
💥💮

Wednesday, October 15, 2014

Hindu Science Facts

 Gayatri Mantra declared the most powerful mantra 🔔🔔🔔🔔🔔🔔
❗Scientific research ❗

Hanuman Chalisa and Gayatri Mantra


Any one who knows the Hanuman Chalisa? In Hanuman Chalisa, it is said :

"Yug sahastra yojan per Bhanu!
Leelyo taahi madhur phal janu!!

1 Yug = 12000 years
1 Sahastra = 1000

1 Yojan = 8 Miles

Yug x Sahastra x Yojan = par Bhanu
12000 x 1000 x 8 miles = 96000000 miles

1 mile = 1.6kms

96000000 miles = 96000000 x 1.6kms =
96000000 miles/1536000000 kms to Sun

NASA has said that, it is the exact distance between Earth and Sun (Bhanu).
Which proves God Hanuman did jump to Planet Sun, thinking it as a sweet fruit (Madhur phal).

It is really interesting how accurate and meaningful our ancient scriptures are.Unfortunately barely it is recognized, interpreted accurately or realized by any in today's time...

The GAYATRI MANTRA" the most powerful hymn in the world

Dr.Howard Steingeril, an American scientist, collected Mantras, Hymns and invocations from all over the world and tested for their strength in his Physiology Laboratory&

Hindu's Gayatri Mantra produced 110,000 sound waves /second...

This was the highest and was found to be the most powerful hymn in the world.
Through the combination of sound or sound waves of a particular frequency, this Mantra is claimed to be capable of developing specific spiritual potentialities.
The Hamburg university initiated research in
to the efficacy of the Gayatri Mantra both on the mental and physical plane of CREATION...

The GAYATRI MANTRA is broadcasted daily for 15 minutes from 7 P.M. onwards over Radio Paramaribo, Surinam, South America for the past two years, and in Amsterdam, Holland for the last six months.

"Om Bhoor Bhuwah Swah, Tat Savitur Varenyam, Bhargo Devasya Dheemahi, Dhiyo Yo Nah Pra-chodayaat !" 😊

"It's meaning:

God is dear to me like my own breath, He is the dispeller of my pains, and giver of happiness.I meditate on the supremely adorable Light of the Divine Creator, that it may inspire my thought and understanding." 

Tuesday, October 7, 2014

Hindi is Great and Ancient Language

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है उसके पीछे कुछ कारण है , अंग्रेजी भाषा में ये बात देखने में नहीं आती | ______________________ क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये | च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ तालू से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये | 😀 त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये । 😀 ________________________ हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं ये सही है परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये | इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा मे नही है जय हिन्द क,ख,ग क्या कहता है जरा गौर करें.... •••••••••••••••••••••••••••••••••••• क - क्लेश मत करो ख- खराब मत करो ग- गर्व ना करो घ- घमण्ड मत करो च- चिँता मत करो छ- छल-कपट मत करो ज- जवाबदारी निभाओ झ- झूठ मत बोलो ट- टिप्पणी मत करो ठ- ठगो मत ड- डरपोक मत बनो ढ- ढोंग ना करो त- तैश मे मत रहो थ- थको मत द- दिलदार बनो ध- धोखा मत करो न- नम्र बनो प- पाप मत करो फ- फालतू काम मत करो ब- बिगाङ मत करो भ- भावुक बनो म- मधुर बनो य- यशश्वी बनो र- रोओ मत ल- लोभ मत करो व- वैर मत करो श- शत्रुता मत करो ष- षटकोण की तरह स्थिर रहो स- सच बोलो ह- हँसमुख रहो क्ष- क्षमा करो त्र- त्रास मत करो ज्ञ- ज्ञानी बनो !!

Wednesday, October 1, 2014

यक्ष-प्रश्न........????

➰यक्ष ने प्रश्न किया – मनुष्य का साथ कौन देता है? 🛂युधिष्ठिर ने कहा – धैर्य ही मनुष्य का साथ देता है. ➰यक्ष – यशलाभ का एकमात्र उपाय क्या है? 🛂युधिष्ठिर – दान. ➰यक्ष – हवा से तेज कौन चलता है? 🛂युधिष्ठिर – मन. ➰यक्ष – विदेश जानेवाले का साथी कौन होता है? 🛂युधिष्ठिर – विद्या. ➰यक्ष – किसे त्याग कर मनुष्य प्रिय हो जाता है? 🛂युधिष्ठिर – अहम् भाव से उत्पन्न गर्व के छूट जाने पर. ➰यक्ष – किस चीज़ के खो जाने पर दुःख नहीं होता? 🛂युधिष्ठिर – क्रोध. ➰यक्ष – किस चीज़ को गंवाकर मनुष्य धनी बनता है? 🛂युधिष्ठिर – लोभ. ➰यक्ष – ब्राम्हण होना किस बात पर निर्भर है? जन्म पर, विद्या पर, या शीतल स्वभाव पर? 🛂युधिष्ठिर – शीतल स्वभाव पर. ➰यक्ष – कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है? 🛂युधिष्ठिर – अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है. ➰यक्ष – सर्वोत्तम लाभ क्या है? 🛂युधिष्ठिर – आरोग्य. ➰यक्ष – धर्म से बढ़कर संसार में और क्या है? 🛂युधिष्ठिर – दया. ➰यक्ष – कैसे व्यक्ति के साथ की गयी मित्रता पुरानी नहीं पड़ती? 🛂युधिष्ठिर – सज्जनों के साथ की गयी मित्रता कभी पुरानी नहीं पड़ती. ➰यक्ष – इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? 🛂युधिष्ठिर – रोज़ हजारों-लाखों लोग मरते हैं फिर भी सभी को अनंतकाल तक जीते रहने की इच्छा होती है. इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है

Monday, September 15, 2014

Tirukkural

Tirukkural written by Tiruvalluvar more than 5000 yrs ago , but not even One Kural of total 1337 have become irrelevant now. It's one of the ancient science on Human behaviour , which has not changed in-spite of environment & technology !  ...

SOME GOLDEN THOUGHTS TO PONDER :-

1. If your child lies to you often, it is because you over-react too harshly to their inappropriate behaviour.

2. If your child is not taught to confide in you about their mistakes, you've lost them.

3. If your child had poor self-esteem, it is because you advice them more than you encourage them.

4. If your child does not stand up for themselves, it is because from a young age you have disciplined them regularly in public.

5. If your child takes things that do not belong to them, it is because when you buy them things, you don't let them chose what they want.

6. If your child is cowardly, it is because you help them too quickly.

7. If your child does not respect other people's feelings, it is because instead of speaking to your child, you order and command them.

8. If your child is too quick to anger, it is because you give too much attention to misbehaviour and you give little attention to good behaviour.

9. If your child is excessively jealous, it is because you only congratulate them when they successfully complete something and not when they improve at something even if they don't successfully complete it.

10. If your child intentionally disturbs you, it is because you are not physically affectionate enough.

11. If your child is openly defied, it is because you openly threaten to do something but don't follow through.

12. If your child is secretive, it is because they don't trust that you won't blow things out of proportion.

13. If your child talks back to you, it is because they watch you do it to others and think its normal behaviour.

14. If your child doesn't listen to you but listens to others, it is because you are too quick to make decisions.

15. If your child rebels it is because they know you care more about what others think than what is right or wrong.

Change starts at home. Try a few if not all and see the sea change in the relations.

Thursday, September 11, 2014

Hindu rituals

१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं । २. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें | ३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं। ४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है। ५. पूजा सुबह 6 से 8बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है | ६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें । इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है | ७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो | ८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं। ९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में | १०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं। ११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है | १२. सप्ताह में एकबार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है | १३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरने आपके पूजा घर में जरुर पहुचे सबसे पहले | १४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो ऐसी व्यवस्था करें ...

Friday, August 22, 2014

जानिए ॐ का महत्त्व

ॐ 🚩ॐ 🚩ॐ 🚩ॐ

 ॐ" के जाप से होता है...
आत्मिक एवं शारीरिक लाभ :-
 ॐ" केवल एक पवित्र ध्वनि ही नहीं, अपितु अनंत शक्ति का प्रतीक है।
 ॐ अर्थात् ओउम् : तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व विदित है । अ उ म् ।
 'अ" का अर्थ है आर्विभाव या उत्पन्न होना,
 "उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,
 "म" का मतलब है मौन हो जाना,  अर्थात्"ब्रह्मलीन" हो जाना ।
 ॐ सम्पूर्णब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है
 ॐ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों का प्रदायक है।
 ॐ का जप कर कई साधकों ने अपने उद्देश्य की प्राप्ति कर ली।
 शुद्ध आसन पर पूर्व की ओर मुख कर एक हज़ार बार ॐ रूपी मंत्र का जाप करने से वर्तमान और भविष्य दोनों ही जीवन लक्ष्य की और अग्रसर होते है।

ॐ उच्चारण की विधि : --
 प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकारध्वनि का उच्चारण करें ।
 ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर इसका उच्चारण 11, 21, 51, 108, 1008 कितनी ही बार अपने समयानुसार कर सकते हैं, जाप या जप माला भी गिन सकते है ।
 ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे भी बोल सकते हैं।

 ॐ के उच्चारण से शारीरिक लाभ : -
1. अनेक बार ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।
2. अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ का उच्चारण करें।
3. यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।
4. यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।
5. इससे पाचन शक्ति तेज़ होती है।
6. इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।
7. थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।
8. नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है, रात को सोते समय नींद आने तक मन में ॐ का जप करने से निश्चित नींद आएगी।
9. कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।
10. ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है,  इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।
11. ॐ के दूसरे शब्द का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो कि थायरायड ग्रंथी पर प्रभाव डालता है।

 जैन सिख बोद्ध और हिंदुत्व मान्य सभी धर्मों में ॐ का विशेष महत्व है ।
जब कभी भी आप कोई काम न कर रहे हों या यात्रा कर रहे हो या मन परेशान हो :--

चित को शांत करने की कोशिश करते हुए  इस अलोकिक पवित्र अक्षर ॐ का मन में उचारण करते रहे और देखे जीवन में चमत्कार!

इस अक्षर के उचारण से आपके आसपास धनात्मक उर्जा का निर्माण होता है, नकारात्मक उर्जा, बीमारी, दुःख, चिंता नष्ट हो कर आपका जीवन स्वर्ग बन जाता है।

मित्रों इसे जीवन में अवश्य अपनाए।🚩ॐ🚩

Wednesday, August 20, 2014

आगंतुक

A tourist visited a famous Indian Yogi. He was astonished to see that the Yogi's home was only a simple room filled with books. The only furniture was a mat and a kerosene lantern.
"Yogi ji, where is your furniture ?" asked the tourist.
"Where is yours ?" replied Yogi.
"Mine ? But I'm only a visitor here."
मैं भी तो .... replied Yogi.

Monday, August 18, 2014

महाभारत से महाज्ञान

महाभारत युद्ध चल रहा था। अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे। जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता, कर्ण का रथ कोसों दूर चला जाता। जब कर्ण का बाण छूटता तो अर्जुन कारथ सात कदम पीछे चला जाता। श्रीकृष्ण ने अर्जुन के शौर्य की प्रशंसा के स्थानपर कर्ण के लिए हर बार कहा कि कितना वीर है यह कर्ण? जो उस रथ को सात कदम पीछे धकेल देता है। अर्जुन बड़े परेशान हुए। असमंजस की स्थिति में पूछ बैठे कि हे वासुदेव! यह पक्षपात क्यों? मेरे पराक्रम की आप प्रशंसा करते नहीं एवं मात्र सात कदम पीछे धकेल देने वाले कर्ण को बारम्बार वाहवाही देते है।श्रीकृष्ण बोले-अर्जुन तुम जानते नहीं। तुम्हारे रथ में महावीर हनुमान एवं स्वयं मैं वासुदेव कृष्ण विराजमान् हूँ। यदि हम दोनों न होते तो तुम्हारे रथ का अभी अस्तित्व भी नहीं होता। इस रथ को सात कदम भी पीछे हटा देना कर्ण के महाबली होने का परिचायक हैं। अर्जुन को यह सुनकर अपनी क्षुद्रता पर ग्लानि भीहुई।इस तथ्य को अर्जुन और भी अच्छी तरह सब समझ पाए जब युद्ध समाप्त हुआ। प्रत्येकदिन अर्जुन जब युद्ध से लौटते श्रीकृष्ण पहले उतरते, फिर सारथी धर्म के नाते अर्जुन को उतारते। अंतिम दिन वे बोले-अर्जुन! तुम पहले उतरो रथ से व थोड़ी दूरी तक जाओ। भगवान के उतरते ही घोड़ा सहित रथ भस्म हो गया। अर्जुन आश्चर्यचकित थे। भगवान बोले-पार्थ! तुम्हारा रथ तो कभी का भस्म हो चुका था। भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य व कर्ण के दिव्यास्त्रों से यह कभी का नष्ट हो चुका था। मेरे-स्रष्टा के संकल्प ने इसे युद्ध समापन तक जीवित रखा था। अपनी विजय पर गर्वोन्नत अर्जुन के लिए गीता श्रवण के बाद इससे बढ़कर और क्या उपदेशहो सकता था कि सब कुछ भगवान का किया हुआ है। वह तो निमित्त मात्र था। काश हमारे अंदर का अर्जुन इसे समझ पायें

Sunday, August 17, 2014

Krishna

राधा ने पूछा मोहन से) :- तुम्हें सब
लोग चोर क्यों कहते हैं ?
(मोहन जी बोले) :- राधे, मैं चोर हूँ,
तभी तो लोग कहते हैं I
(राधा जी ने फिर पूछा) :- तुम क्या -
क्या चुराते हो ?
(कान्हा जी बोले) :- तो फिर सुनो,
जब मैं छोटा था तब मैं सब का मन चुराया करता था I
फिर थोड़ा बड़ा हुआ तो मैं माखन चुराने लगा
जब थोड़ा और बड़ा हुआ तो मैंने
गोपिओं के वस्त्र चुराये I
उस के बाद मैं
भक्तों के प्यार में ऐसा हो गया, की मैंने
एक नए तरह की चोरी शुरू कर
दी I
(राधा जी बोली) :-
कैसी चोरी ?
(कान्हा जी ने बड़ा अच्छा जवाब
दियi) :- आज कल मैं अपने भक्तों के पाप
भी चुरा लेता हूँ I

Thursday, July 24, 2014

महाभारत से महाज्ञान

श्रीकृष्ण द्वारका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे, निकट ही गरुड़ और सुदर्शन चक्र भी बैठे हुए थे। तीनों के चेहरे पर दिव्य तेज झलक रहा था। बातों ही बातों में रानी सत्यभामा ने श्रीकृष्ण से पूछा कि हे प्रभु, आपने त्रेता युग में राम के रूप में अवतार लिया था, सीता आपकी पत्नी थीं। क्या वे मुझसे भी ज्यादा सुंदर थीं? द्वारकाधीश समझ गए कि सत्यभामा को अपने रूप का अभिमान हो गया है। तभी गरुड़ ने कहा कि भगवान क्या दुनिया में मुझसे भी ज्यादा तेज गति से कोई उड़ सकता है। इधर सुदर्शन चक्र से भी रहा नहीं गया और वह भी कह उठे कि भगवान, मैंने बड़े-बड़े युद्धों में आपको विजयश्री दिलवाई है। क्या संसार में मुझसे भी शक्तिशाली कोई है?
भगवान मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे। वे जान रहे थे कि उनके इन तीनों भक्तों को अहंकार  हो गया है और इनका अहंकार नष्ट होने का समय आ गया है। ऐसा सोचकर उन्होंने गरुड़ से कहा कि हे गरुड़! तुम हनुमान के पास जाओ और कहना कि भगवान राम, माता सीता के साथ उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। गरुड़ भगवान की आज्ञा लेकर हनुमान को लाने चले गए। इधर श्रीकृष्ण ने सत्यभामा से कहा कि  देवी आप सीता के रूप में तैयार हो जाएं और स्वयं द्वारकाधीश ने राम का रूप धारण कर लिया। मधुसूदन ने सुदर्शन चक्र को आज्ञा देते हुए कहा कि तुम महल के प्रवेश द्वार पर पहरा दो। और ध्यान रहे कि मेरी आज्ञा के बिना महल में कोई प्रवेश न करे।
भगवान की आज्ञा पाकर चक्र महल के प्रवेश द्वार पर तैनात हो गए। गरुड़ ने हनुमान के पास पहुंच कर कहा कि हे वानरश्रेष्ठ! भगवान राम माता सीता के साथ द्वारका में आपसे मिलने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। आप मेरे साथ चलें। मैं आपको अपनी पीठ पर बैठाकर शीघ्र ही वहां ले जाऊंगा। हनुमान ने विनयपूर्वक गरुड़ से कहा, आप चलिए, मैं आता हूं। गरुड़ ने सोचा, पता नहीं यह बूढ़ा वानर कबnn पहुंचेगा। खैर मैं भगवान के पास चलता हूं। यह सोचकर गरुड़ शीघ्रता से द्वारका की ओर उड़े। पर यह क्या, महल में पहुंचकर गरुड़ देखते हैं कि हनुमान तो उनसे पहले ही महल में प्रभु के सामने बैठे हैं। गरुड़ का सिर लज्जा से झुक गया।     तभी श्रीराम ने हनुमान से कहा कि पवन पुत्र तुम बिना आज्ञा के महल में कैसे प्रवेश कर गए? क्या तुम्हें किसी ने प्रवेश द्वार पर रोका नहीं? हनुमान ने  हाथ जोड़ते हुए सिर झुका कर अपने मुंह से सुदर्शन चक्र को निकाल कर प्रभु के सामने रख दिया। हनुमान ने कहा कि प्रभु आपसे मिलने से मुझे इस चक्र ने रोका था, इसलिए इसे मुंह में रख मैं आपसे मिलने आ गया। मुझे क्षमा करें। भगवान मंद-मंद मुस्कुराने लगे। हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए श्रीराम से प्रश्न किया हे प्रभु! आज आपने माता सीता के स्थान पर किस दासी को इतना सम्मान दे दिया कि वह आपके साथ सिंहासन पर विराजमान है।
अब रानी सत्यभामा के अहंकार भंग होने की बारी थी। उन्हें सुंदरता का अहंकार था, जो पलभर में चूर हो गया था। रानी सत्यभामा, सुदर्शन चक्र व गरुड़ तीनों का गर्व चूर-चूर हो गया था। वे भगवान की लीला समझ रहे थे। तीनों की आंख से आंसू बहने लगे और वे भगवान के चरणों में झुक गए। अद्भुत लीला है प्रभु की। अपने भक्तों के अंहकार को अपने भक्त द्वारा ही दूर किया।