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Thursday, January 8, 2015

सहनशक्ति सबसे बड़ा गुण है

एक सिंह और एक चीता एक साथ बैठे हुए थे I कुछ देर बाद उनके पास से एक गधा गुजरा, उसने सिंह से कहा, 'आओ मेरे साथ लड़ लो...!' सिंह ने उसकी ओर देखा तक नहीं I दूसरी बार गधे ने बड़े रुआब से कहा, 'यदि तुम्हें लड़ना हो तो मेरे सामने आओ...!' सिंह ने फिर भी कुछ न कहा और शांत बैठा रहा I गधा वहाँ से आगे बढ़ गया I थोड़ी देर के बाद गधा पुनः आया और चेतावनी भरे स्वर में बोला, 'देखो, आखिरी बार कह देता हूँ कि तुम्हें यदि लड़ना है, तो मेरे सामने मैदान में आ जाओ...!' लेकिन सिंह ने गधे की ओर देखा तक नहीं और गधा वहाँ से चला गया I उसके जाने के बाद चीते ने सिंह से कहा, 'मित्र!  यह गधा, तुम्हारे बाँए पंजे की खुराक है, लेकिन तुमने इतना सब कुछ सहन क्यों किया ?' सिंह ने कहा, 'यदि उसे मारना ही होता तो मैं एक मिनट में उसका काम तमाम कर देता, लेकिन लोक में इस बात की हँसी होती कि सिंह और गधे में युद्ध हुआ, जिसमें सिंह ने गधे को मार डाला ! इसमें मेरी कोई सभ्यता तो थी ही नहीं, इससे मेरी कोई बड़ाई भी न थी I इसलिए ऐसी दशा में मौन रहना ही उचित है I'

इसलिए सहनशीलता को विवशता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए I यह तो एक प्रकार की शूरवीरता है तथा जो बाद में सम्मान का कारण भी बनती है I
**Tolerance is the only real test of civilization and it is best religion.**

Wednesday, December 31, 2014

चोट

एक सुनार था, उसकी दुकान से मिली हुई एक लोहारकी दुकान थी।सुनार जब काम करता तो उसकी दुकान से बहुतधीमी आवाज़ आती, किन्तु जब लोहार कामकरता तो उसकी दुकान से कानों को फाड़ देने वाली आवाज़सुनाई देती।.एक दिन एक सोने का कण छिटक कर लोहार की दुकान में आगिरा। वहाँ उसकी भेंट लोहार के एक कण के साथ हुई।सोने के कण ने लोहे के कण से पूछा- भाई हम दोनों का दुखएक समान है, हम दोनों को ही एक समान आग मेंतपाया जाता है और समान रूप ये हथौड़े की चोटसहनी पड़ती है। मैं ये सब यातना चुपचाप सहता हूँ, पर तुमबहुत चिल्लाते हो, क्यों?..लोहे के कण ने मन भारी करते हुऐ कहा-तुम्हारा कहना सही है, किन्तु तुम पर चोट करनेवाला हथौड़ा तुम्हारा सगा भाई नहीं है। मुझ पर चोटकरने वाला लोहे का हथौड़ा मेरा सगा भाई है।.मोरल : परायों की अपेक्षा अपनों द्वारा दी गई चोटअधिक पीड़ा पहुचाँती है।

Sunday, December 28, 2014

Trustworthy

एक बादशाह अपने गुलाम से बहुत प्यार करता था ।
एक दिन दोनों जंगल से गुज़र रहे थे, वहां एक वृक्ष पर एक ही फल लगा था ।
हमेशा की तरह बादशाह ने एक फांक काटकर गुलाम को खाने के लिये दी। गुलाम को स्वाद लगी, उसने धीरे- धीरे सारी फांक लेकर खाली और आखरी फांक भी झपट कर खाना चाहता था।
बादशाह बोला, हद हो गई । इतना स्वाद ।
गुलाम बोला, हाँ बस मुझे ये भी दे दो। बादशाह से ना रहा गया, उसने
आखरी फांक खुदके मुह में ड़ाल ली। वो स्वाद तो क्या होनी थी, कडवी जहर थी।
बादशह हैरान हो गया और गुलाम से बोला, "तुम इतने कडवे फल को आराम से खा रहे थे और कोई शिकायत भी नहीं की ।"
गुलाम बोला, "जब अनगिनत मीठे
फल इन्ही हाथो से खाये और अनगिनत सुख इन्ही हाथो से मिले तो इस छोटे से कडवे फल के लिये शिकायत कैसी।"
मालिक मैने हिसाब रखना बंद कर दिया है, अब तो मै इन देने वाले हाथों को ही देखता हूँ । बादशाह की आँखों में आंसू आ गए । बादशाह ने कहा, इतना प्यार और उस गुलाम को गले से लगा लिया ।
.
Moral- हमे भी परमात्मा के हाथ से भेजे गये दुःख और सुख को ख़ुशी ख़ुशी कबूल करना चाहिये । परमात्मा से शिकायत नहीं करनी चाहिये....

Saturday, December 27, 2014

MOTIVATION and PRIORITIZATION

⭕⭕

एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे
आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें
टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ...
उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ ...
आवाज आई ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये ,
फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ
.. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा ..

सर ने टेबल के नीचे से
चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित
थोडी सी जगह में सोख ली गई ...

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया

इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ....

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान , परिवार , बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं ,

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बडा़ मकान आदि हैं , और

रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे़ है ..

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ...
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ...

यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय
नहीं रहेगा ...

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने
बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ ,
घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ...
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है
... बाकी सब तो रेत है ..
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे ..

अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया
कि " चाय के दो कप " क्या हैं ?

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ...
इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये ।

( अपने खास मित्रों और निकट के व्यक्तियों को यह विचार तत्काल बाँट दो .. मैंने अभी - अभी यही किया है)

Friday, December 26, 2014

Trendy

असम में 70 लोगों को नक्सलियों ने मार दिया......मैं इस बात से हैरान परेशान हूँ की किसी का मेसेज नहीं आया DP में कैंडल लगाने के लिए?

बहुत से लोग  पागल हुए जा रहे थे अपनी भावनाये दिखाने में उन पाकिस्तानी बच्चों के क़त्ल पर ( वो मुल्क जो कि एक आतंकवाद की फैक्ट्री से बढ़कर कुछ नहीं और जो हमारे लोगो के क़त्ल पर जश्न मनाते है)।
आपकी मानवीय भावना कहाँ हवा हो जाती है  जब अपने ही देश मे।   ,

अभी PK के hangover से बाहर भी नहीं निकले है। हमारे LOGIC को फिर से बुखार हो गया लगता है। किसी भी त्यौहार में अपने देश की संस्कृति झलकनी चाहिए। होली और दिवाली जैसे हिंदुस्तानी त्योहारों का एक रिवाज और परंपरा है। ये हमारे अपने त्यौहार है। इसमें करने वाले अन्न का अर्पण और पूजा विधान हमारी आस्था से जुड़ा है।

जिसने मेरे देश को लूटा उनकें त्योंहार मनाउं कैसे
जिस पेड़ के कोई गुण न हो उस पेड़ को सजाउं कैसे
जब न दी बधाई उसने  की उनको बधाई देने के लिये अपने मन को समझाउं कैस

जिन्होंने कभी तुलसी का पौधा नहीं लगाया घर में , आज वो क्रिसमस -ट्री सजाने में ज़ोर शोर से लगे हैं....?
25 दिसम्बर को तुलसी का पूजन करे,,,क्रिसमस ट्री का नहीं।
आओ भारतीय संस्कृति का पूजन
करे।

Wednesday, December 17, 2014

Life

नींद और मौत में क्या फर्क है...?
     किसी ने क्या खूबसूरत जवाब दिया है....

"नींद आधी मौत है"

और

"मौत मुकम्मल नींद है"

जिंदगी तो अपने ही तरीके से चलती है....

औरों के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं।

सुबहे होती है , शाम होती है

उम्र यू ही तमाम होती है ।

कोई रो कर दिल बहलाता है

और

कोई हँस कर दर्द छुपाता है.

क्या करामात है कुदरत की,

ज़िंदा इंसान पानी में डूब जाता है

और मुर्दा तैर के दिखाता है...

बस के कंडक्टर सी हो गयी है
जिंदगी ।

सफ़र भी रोज़ का है और
जाना भी कही नहीं।.....

सफलता के सात भेद, मुझे अपने कमरे के अंदर
ही उत्तर मिल गये !

छत ने कहा : ऊँचे उद्देश्य रखो !

पंखे ने कहा : ठन्डे रहो !

घडी ने कहा : हर मिनट कीमती है !

शीशे ने कहा : कुछ करने से पहले अपने अंदर झांक
लो !

खिड़की ने कहा : दुनिया को देखो !

कैलेंडर ने कहा : Up-to-date रहो !

दरवाजे ने कहा : अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के
लिए पूरा जोर लगाओ !

लकीरें भी बड़ी अजीब होती हैं--
माथे पर खिंच जाएँ तो किस्मत बना देती हैं

जमीन पर खिंच जाएँ तो सरहदें बना देती हैं

खाल पर खिंच जाएँ तो खून ही निकाल देती हैं

और रिश्तों पर खिंच जाएँ तो दीवार बना देती हैं..

एक रूपया एक लाख नहीं होता ,

मगर फिर भी एक रूपया एक लाख से निकल जाये तो वो लाख भी लाख नहीं रहता

हम आपके लाखों दोस्तों में बस वही एक रूपया हैं …

संभाल के रखनT , बाकी सब मोह माया है



Friendship

पानी ने दूध से मित्रता की
और उसमे समा गया,
जब दूध ने पानी का समर्पण देखा तो उसने कहा :मित्र तुमने अपने स्वरुप का त्याग कर मेरे स्वरुप को धारण किया है अब मैं
भी मित्रता निभाऊंगा और तुम्हे अपने मोल बिकवाऊंगा,

दूध बिकने के बाद जब उसे उबाला जाता है तब पानी कहता है अब मेरी बारी है मै मित्रता निभाऊंगा और तुमसे पहले मै
चला जाऊँगा और दूध से पहले पानी उड़ता जाता है

जब दूध मित्र को अलग होते देखता है तो उफन कर गिरता है और आग को बुझाने लगता है, जब पानी की बूंदे उस पर छींट कर उसे अपने मित्र से
मिलाया जाता है तब वह फिर शांत हो जाता है

पर इस अगाध प्रेम में थोड़ी सी खटास (निम्बू की दो चार बूँद ) डाल दी जाए तो दूध और पानी अलग हो जाते हैं
थोड़ी सी मन की खटास अटूट
प्रेम को भी मिटा सकती हैं|
������

Prayer to God

हे सावरे
सुकून उतना ही देना प्रभु जितने से जिंदगी चल
जाए,
औकात बस
इतनी देना कि औरों का भला हो जाए,
रिश्तो में गहराई इतनी हो कि प्यार से निभ
जाए,
आँखों में शर्म इतनी देना कि बुजुर्गों का मान
रख पायें,
साँसे पिंजर में इतनी हों कि बस नेक काम कर
जाएँ,
बाकी उम्र ले लेना कि औरों पर बोझ न बन
जाएँ !!

Wednesday, November 26, 2014

माँ

बचपन की एक रात बहुत याद आती है,
उस रात
को मेरे पेट मैं दर्द हो रहा था |
सारे दिन
की थकी हारीं माँ सो रही थी,
मेरा टसकना सुनकर माँ जाग उठी | मुझे प्यार से सीने से लगाया,
नमक अजवान का चूरन दिया,
सारी रात जाग कर मुझे सीने से लगाए
रखी ||
अबमें जवान हो गया हूँ,
मेरी शादी भी हो गई हैं, एक रात फिर मेरे पेट में भयंकर दर्द उठा |
दर्द के मारे टसकने लगा,
मेरी पत्नी की नींद टूट गई,
कहने लगी रात मैं भी सोने नहीं देते,
पेट को भी रात मैं ही दुखना था,
किसी तरह रात निकालो सुबह डॉक्टर को दिखला देना |
रात कैसे निकले,
सहमता सा माँ को उठाया,
माँ ने अपनी ममता की कोंख में
सुलाया, नमक
अजवान का चूरन दिया पेट पर नारियल का तेल लगाया,
पेट का दर्द कम हो गया
और मुझे नींद आगई
माँ ने उलाहना दिया क्यों बहु
को उठाया??
बेचारी सारे दिन काम कर कर सोई हैं मुझे पहलेही उठा लेता ||
यह तो माँ की ममता हैं
इसकी न कोई समता हैं ||
जब मेरी पत्नी माँ बनेगी,
तो क्या वह भी अपने बच्चे को सुबह
ही डॉक्टर को दिखलाएगी??
सचमुच दोस्तों,
माँ तो माँ ही होती है |
अपनी औलाद का दर्द
जितना माँ की ममता को होता है,
किसी को नहीं होता || अगर कहानी पसंद आई
तो शेयर जरूर करना......

Sunday, November 23, 2014

Jindagi

जिन्दगी को बहुत   seriously  मत लो,

कभी मुस्कुराने का भी वक्त निकालो,

वरना लोग आपको देखकर बोलेगें . . .

घोर कलियुग है आजकल ,

Cartoons  भी tension में रहते हैं.

Friday, November 14, 2014

Our Generation

We, the people born between 1950-1989, are the blessed ones...
We are d awesome people. Our life is a living proof..........
      We were never treated like  a pack of animals to carry our books to school.
             While playing and riding bicycle, we never bothered to wear helmets.
             After school time we played until its dusk but never watched t-world (TV) by locking up ourselves in a room.
            We played only with our real friends, not with NET friends.
             If we ever felt thirsty, we used to drink tap water but never searched for bottled water.
             We never got ill even after sharing the same juice with four friends.
             We were never put on weight even after eating plate full of sweets and rice everyday.
             Nothing happened to our feet even after roaming bare foot.
             We never used any health supplements to keep ourselves healthy.
              We used to create our own toys and play with them.
              Our parents were not rich, they never ran behind money and wealth. They just searched for and gave only love.. not any worldly materials.
             We stayed nearby to them so that they can communicate with us. Just one word by them was enough to communicate. hence we never required any mobile phones to communicate.
           We never visited doctor when we got ill but the doctor visited us during our illness.
            We never used to share our emotions just by emoticons in mobile phones.
           We used to listen to the truth and voice of our conscience and used to write those things only in the letters, hence we never used to change our words.
             We never had cellphones, DVDs, Play stations, XBoxes, video games, Personal computers, internet, chat but we had many real friends.
              We used to visit our friend's home uncalled and enjoyed food with them. We never had to call them and ask their permission to visit their home.
            Relatives were near to us so our hearts and souls were happy. Hence we never required any insurance policy.
             We may have been in Black and White photos but you can find good colourful memories in those photos........
    excellent ..  So true

Tuesday, November 11, 2014

A Point of View

A 24year Old boy seeing out from the Train's window shouted : "Dad, look the trees are going behind!" Dad smiled and a young Couple sitting nearby, looked at the 24year Old's Childish behaviour with Pity. Suddenly he again Exclaimed. . "Dad look the clouds are running with Us!" The couple couldn't resist & said tothe old Man : "why don't you take your Son to a good Doctor?" The Old man smiled & Said : "I did and we are just coming from the hospital, my son was blind from birth, he just got his eyes today." . . MORAL : Every Single Person On The Planet Has a Story, Don't Judge People Before You Truly Know Them. The Truth Might Surprise You. !!!!

Monday, November 10, 2014

Indian are not so wise

अमेरिका सबसे धनी देश है, वहां के स्कूल साल के
शुरुआत में बच्चों को किताबें इशू करते हैं और साल
के अंत में उनसे जमा करा लेते है ताकि दुसरे
बच्चों को उन किताबों को पढने
का मौका मिले.
भारत गरीब देश है, पर यहाँ हर साल पुराने किताबों को रददी के भाव बेच दिया जाता है
और नए किताबों को ख़रीदा जाता है, या यूँ
कहें की अभिभावकों को नई किताब खरीदने
को विवश
किया जाता है .....करोड़ो रुपयों की बर्बादी लाखों पेड़
की कटाई .... फिर पर्यावरण को बचाने की सतरंगी मुहीम फिर करोड़ों रूपये की लुट, .. ये
हमारे शिक्षा के मंदिर और और उसे संचालित
करने वाले दलालों द्वारा हो रहा है .... सत्ता तो बदल गयी पर व्यवस्था नही बदली
आइये मानव संसाधन विभाग
को जरा कुम्भ्करणी नींद से जगाया जाये ...अच्छा लगे तो उसे अपने दोस्तों को आगे बढाने का कष्ट करें ओर क्रांति लाओ

Saturday, November 8, 2014

Joke of the Day

एक जाट की 50 करोड की लाटरी निकल आई, लोग खुब बधाईया दे रहे थे जाट को, तो जाट बोला अरे यह सब तो मेरे दिमाग का काम है, मेने 8 नम्बर पर लाटरी लगाई थी??, तो लोगो ने पुछा जाट भाई 8 नम्बर पर ही क्यो?? तो जाट बोल्या मेरे को सब से पहले सपने मै 16 नम्बर दिखा, ओर फ़िर 2 नम्बर दिखा, ओर मेने जागने पर 16x2=8 ओर मेने झट से 8 नम्बर की लाटरी खरीद ली, फ़िर लोगो ने कहा लेकिन जाट भाई 16x2= तो 32 होते है, जाट बोल्या अरे बाऊली बुचो अगर मै भी तुम्हारी तरह से गुणा करता तो यह लाटरी केसे निकलती,

Thursday, November 6, 2014

Success is hard

"I slept on benches and everyday borrowed 20Rs/- from friend to travel to film city"
- Sharukh khan

"I failed in 8th standard"
-SACHIN TENDULKAR

"During my secondary school, I was dropped from school basketball
team"
-MICHAEL JORDAN
...
"I was rejected for the job in ALL INDIA RADIO bcoz of my heavy voice"
- AMITABH BACCHAN

"I used to work in petrol pump"
- DHIRUBHAI AMBANI

"I was rejected in d interview of PILOT"
- ABDUL KALAM

"I didn't even complete my university education"
- Bill Gates !!

"I was a dyslexic kid"
- TOM CRUIZE

"I was raped at the age of 9 "
- Oprah Winfrey

"I used to serve tea at a shop to support my football training"
- Lionel Messi

"I used to sleep on the floor in friends'rooms,returning Coke bottles for food, money, and getting weekly free meals at a local temple"
-Steve Jobs !!

"My teachers used to call me a failure"
- Tony Blair

"I was in prison for 27 years"
- Late President Nelson Mandela

and here comes d "THALIVA"

"At d age of 30, I was a bus conductor"
-RAJNI KANT

"Friends, there are many such people who struggled.. 

Life is not about what you couldn't do so far,
it's about what you can still do. 
Wait and don't ever give up..
Miracles happen every day....!! Latest miracle will be : A chaiwala becoming prime minister of India.
Rs.20 Seems Too Much To Give A Beggar But It Seems Okay When Its Given As Tip At A Fancy Restaurant.

After A Whole Day Of Work, Hours At The Gym Seem Alright But Helping Your Mother Out At Home Seems Like A Burden.

Praying To God For 3 Min Takes Too Much Time But Watching A Movie For 3 Hours Doesn't.

We Wait A Whole Year For Valentine's Day But We Always Forget Mother's Day.

Two Poor Starving Kids Sitting On The Pavement Weren't Given Even A Slice Of Bread But A Painting Of Them Sold For Lakhs Of Rupees.

We Don't Think Twice About Forwarding Jokes But We Will Rethink About Sending This Message On.

Tuesday, October 28, 2014

बोध कथा


एक बार एक महात्मा ने अपने शिष्यों से अनुरोध किया कि वे कल
से प्रवचन में आते समय अपने साथ एक थैली में बडे़ आलू साथ
लेकर आयें, उन आलुओं पर उस व्यक्ति का नाम
लिखा होना चाहिये जिनसे वे ईर्ष्या करते हैं । जो व्यक्ति जितने
व्यक्तियों से घृणा करता हो, वह उतने आलू लेकर आये ।
अगले दिन सभी लोग आलू लेकर आये, किसी पास चार आलू थे,
किसी के पास छः या आठ और प्रत्येक आलू पर उस
व्यक्ति का नाम लिखा था जिससे वे नफ़रत करते थे ।
अब महात्मा जी ने कहा कि, अगले सात दिनों तक ये आलू आप
सदैव अपने साथ रखें, जहाँ भी जायें, खाते-पीते, सोते-जागते, ये
आलू आप सदैव अपने साथ रखें । शिष्यों को कुछ समझ में
नहीं आया कि महात्मा जी क्या चाहते हैं, लेकिन महात्मा के आदेश
का पालन उन्होंने अक्षरशः किया । दो-तीन दिनों के बाद
ही शिष्यों ने आपस में एक दूसरे से शिकायत करना शुरू किया,
जिनके आलू ज्यादा थे, वे बडे कष्ट में थे । जैसे-तैसे उन्होंने सात
दिन बिताये, और शिष्यों ने महात्मा की शरण ली । महात्मा ने
कहा, अब अपने-अपने आलू की थैलियाँ निकालकर रख दें,
शिष्यों ने चैन की साँस ली ।
महात्माजी ने पूछा – विगत सात दिनों का अनुभव कैसा रहा ?
शिष्यों ने महात्मा से अपनी आपबीती सुनाई, अपने
कष्टों का विवरण दिया, आलुओं की बदबू से होने वाली परेशानी के
बारे में बताया, सभी ने कहा कि बडा हल्का महसूस हो रहा है…
महात्मा ने कहा – यह अनुभव मैने आपको एक शिक्षा देने के
लिये किया था…
जब मात्र सात दिनों में ही आपको ये आलू बोझ लगने लगे, तब
सोचिये कि आप जिन व्यक्तियों से ईर्ष्या या नफ़रत करते हैं,
उनका कितना बोझ आपके मन पर होता होगा, और वह बोझ आप
लोग तमाम जिन्दगी ढोते रहते हैं, सोचिये कि आपके मन और
दिमाग की इस ईर्ष्या के बोझ से क्या हालत होती होगी ? यह
ईर्ष्या तुम्हारे मन पर अनावश्यक बोझ डालती है, उनके कारण
तुम्हारे मन में भी बदबू भर जाती है, ठीक उन आलुओं की तरह….
इसलिये अपने मन से इन भावनाओं को निकाल दो,
यदि किसी से प्यार नहीं कर सकते तो कम से कम नफ़रत मत
करो, तभी तुम्हारा मन स्वच्छ, निर्मल और हल्का रहेगा,
वरना जीवन भर इनको ढोते-ढोते तुम्हारा मन भी बीमार हो जायेगा 

Thursday, October 23, 2014

Safety Tips

अगर आप रात में गाड़ी चला रहे हैं और कोई आपके WINDSCREEN पर अंडे फेंके तो कार की जांच के लिए रोकें नहीं,
वाइपर संचालित भी ना करें और किसी भी तरह का पानी विंडस्क्रीन पे ना डाले,
क्योंकि अंडे के साथ मिश्रित पानी दूधिया बन जाता है और आपकी दृष्टि को 92.5% तक के लिए ब्लॉक कर देता है और फिर आपको मजबूरन गाडी को सड़क के बगल में बंद करना पड़ता है और फिर आप पहले से घात लगाये बैठे अपराधियों का शिकार बन जाते है। यह एक नई तकनीक है इसका प्रयोग आजकल हाईवे पे अपराधिक गिरोहो द्वारा किया जाता है कृपया अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को जरुर सूचित करें।


 जरूर पढेँ... और send
करना मत भूलेँ .?
यदि कोई
ATM CARD समेत
आपका अपहरण कर ले
तो विरोध मत कीजिए ।
अपहर्ता की इच्छानुसार
ATM मशीन  मेँ कार्ड
डालिए ।
आपका कोड वर्ड रिवर्स
मेँ डायल कीजिए । जैसे
यदि आपका कोड
1234 की जगह 4321
डायल कीजिए । ऐसा करने
पर ATM खतरे
को भाँपकर
पैसा तो निकालेगा..
लेकिन आधा ATM मशीन मेँ
फँसा रह जायेगा ।
इसी बीच मेँ ATM मशीन
खतरे को भाँपकर बैंक
और नजदीकी पुलिस स्टेशन
को सूचित कर देगा और
साथ ...
ही ATM का डोर
ऑटो लॉक हो जाएगा ।
इस तरह बगैर
अपहर्ता को भनक लगे आप
सुरक्षित बच जाएँगे ।
ATM मेँ पहले से
ही सिक्योरिटी मैकेनिजम
है जिसकी जानकारी बहुत
कम
लोगोँ को है ।

Monday, October 13, 2014

काँच की बरनी और दो कप चाय ~*~

जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी
से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम
पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , " काँच की बरनी और दो कप चाय " हमें याद आती
है ।

दर्शनशास्त्र के एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे
आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी़ बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें
टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ...
उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ ...
आवाज आई ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये h धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये ,
फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ
.. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा ..

सर ने टेबल के नीचे से
चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित
थोडी़ सी जगह में सोख ली गई ...

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया


इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ....

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान , परिवार , बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं ,

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बडा़ मकान आदि हैं , और

रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे़ है ..

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ...
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ...

यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय
नहीं रहेगा ...

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने
बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ ,
घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ...
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है
... बाकी सब तो रेत है ..
छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे ..

अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया
कि " चाय के दो कप " क्या हैं ?

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ...
इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये ।

Saturday, October 11, 2014

Nice one dedicated to all married people..

अन्त में हम दोनों ही होंगे !!!.

भले ही झगड़े, गुस्सा करे,
एक दूसरे पर टूट पड़े
एक दूसरे पर दादागिरि करने के
 लिये, अन्त में हम दोनों ही होंगे

जो कहना हे, वह कह ले,
जो करना हे, वह कर ले
एक दुसरे के चश्मे और
लकड़ी ढूँढने में,
अन्त में हम दोनों ही होंगे

मैं रूठूं तो तुम मना लेना,
तुम रूठो ताे मै मना लूँगा
एक दुसरे को लाड़ लड़ाने के लिये,
अन्त में हम दोनों ही होंगे

आँखे जब धुँधली होंगी,
याददाश्त जब कमजोर होंगी
तब एक दूसरे को एक दूसरे
मे ढूँढने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे

घुटने जब दुखने लगेंगे,
कमर भी झुकना बंद करेगी
तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे

"मेरी हेल्थ रिपोर्ट एक दम नॉर्मल
 है, आइ एम आलराईट
ऐसा कह कर ऐक दूसरे को
 बहकाने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे

साथ जब छूट जायेगा,
बिदाई की घड़ी जब आ जायेगी
तब एक दूसरे को माफ करने के लिए,
अन्त में हम दोनों ही होंगे.